जी ० टी ० बी ० पब्लिक स्कूल (G.T. B. Public school ) छोड़ने के बाद मैने अपने किराए के मकान में किंडरगार्टन स्कूल शुरू किया ।
तीन बच्चे थे । एक टीचर अपॉइंट किया था मैने । दूसरी टीचर मैं खुद थी। स्कूल का नाम था जाकंड बर्ड ( Jocund Bird) । यह नाम मेरे पिता ने रखा था स्कूल का ।
मेरे मन में भय था कि कहीं बोर्ड चोरी न हो जाए । इसलिए प्रति दिन सुबह मैं स्कूल का बोर्ड मकान के बाहर लगाती थी और शाम को घर के अंदर रख लेती थी ।
शाम को स्कूल की बिल्डिंग में ट्यूशन पढ़ाती थी ।
मेरे पास आठ वर्ष का प्राइवेट स्कूलों का अनुभव था ।
स्कूल की किताबें मैने खुद बेचीं।
सपना था स्कूल चल निकलेगा ।
यह स्कूल एक साल चला ।
फिर स्कूल बंद करना पड़ा क्यों कि स्कूल से इतनी आमदनी नहीं हुई कि मैं मकान का किराया चुका सकूं ।
तीनों बच्चों का एडमिशन मैने पास के किंडरगार्टन स्कूल में करवा दिया ।
और स्कूल काल कवलित हुआ ।
मेरे पिता भी दुखी भी अवश्य हुए होंगे । लेकिन वे कुछ बोले नहीं।
#संस्मरण
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