Friday, 19 December 2025

मुंबई में कुछ वर्ष

 

कुछ साल मुंबई में क्या रही कि मोहित हो गई म्हारष्ट्र के कल्चर से । छोटी छोटी लड़कियां लड़के कॉलोनी के प्रोग्राम में नृत्य करते थे। मराठी मूवी की ओर आकर्षित हुईं मैं । मराठी मूवी देखने लगी । मराठी भाषा मुझ जैसी हिंदीभाषी को आसानी से समझ आ जाती है ।

 

उड़ीसा में रहने के कारण मैं बंगाल के साहित्य और कल्चर से मुग्ध थी । बिहार और उड़ीसा के आदिवासी समाज से परिचय था थोड़ा बहुत । महाराष्ट्र जाने के बाद मेरा परिचय सावित्री बाई फुले , ज्योति राव फुले , आनंदी बाई गोपाल राव जोशी के नामों से परिचित हुई।

इंसान जितना घूमता है उतना ज्यादा ज्ञान होता है । किताबों का ज्ञान तो मात्र किताबी होती है । विभिन्न राज्य या देश के लोगों से हम जब मिलते हैं तो वे हमारे दिल पर अमित छाप छोड़ते हैं । 

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