Sunday, 26 January 2025

अनपढ़ लड़की




#इन्दु_बाला_सिंह


अनपढ़ लड़की को पत्नी बना कर घर लाने जैसा 


सुकून का कोई काम नहीं ।आपको अपने बच्चे  


मिलेंगे और घर को व्यवस्थित रखने के लिये ख़ाना 


कपड़ा और थोड़ा सम्मान देने पर एक हाड़ मांस 


वाला रोबोट मिलेगा । समझदार घरों में ऐसी बहुएँ 


और पत्नियाँ मिलेंगी । अनपढ़ होना कोई समस्या 


थोड़े न है। 



सुख




#इन्दु_बाला_सिंह


अपने माता पिता का मान रखनेवाले को समय 


ढूँढेगा ।वह उसे याद रखेगा । दुनिया उसे तालश 


लेगी। लोग उसे सुख पहुँचायेंगे ।


अपने लिये सुख शांति तलाशना बेमानी है ।



स्कूल घर आया

 


#इन्दु_बाला_सिंह


शिक्षक महोदय मेरे  घर आ गये थे ।


“ मैं आपके बच्चे का स्टडी रूम देखना चाहता हूँ ।’


और मैंने मना कर दिया ।


वे लौट गये।


क्यों ? कमरे की रूप रेखा पर पढ़ाई निर्भर करती है !


ये क्या चोंचला है ।


जिसे पढ़ना है वह बच्चा बरामदे में पसीना बहा के भी पढ़ सकता है ।


मुझे यह नफ़ासत कभी न भाई ।


हमारा ऐसा देश जहां बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने में एड़ी चोटी का ज़ोर लगाते हैं । अच्छे स्कूल इतने मंहगे हैं । माता पिता दोनों को कमाना पड़ता है घर चलाने के लिये । 


जिस बच्चे के पास स्टडी रूम नहीं है वो बच्चा नहीं पढ़ सकेगा ! 


घर में पढ़ाई के लिये इच्छा शक्ति और लगन चाहिये ।



रंग न बदलें



#इन्दु_बाला_सिंह


अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता लोकोक्ति यूँ ही 


नहीं बनी । 


गाँव की सरलता सहजता , रिश्तों का महत्व 


मान हम शहर में नहीं पा सकते । महानगर में 


तो बिलकुल नहीं ।


अपना परिवार घट रहा है । पति पत्नी को सह 


नहीं पा रहा है । बच्चे पिता को सह नहीं पा रहे हैं 


। घर की औरतें अपनी नौकरी और घरेलू 


ज़िम्मेवारी में हल्कान हैं । पड़ोस के इंसान  


आपस में बात नहीं करते । घरों में कुत्ते पल रहे 


हैं ।


हमारे संस्कार के बीच खाई है । हम  या तो 


शहरी रहें या गवइं रहें ।


 न जाने कैसे हमने विदेश  का चलन आत्मसात् 


कर लिया ।


तो भैया जहां रहो वहाँ की चाल अपनाओ ।



लड़की की पैतृक संपत्ति

  


#इन्दु_बाला_सिंह


बेटी को अपने पिता से वसीयत में मकान तभी 


मिलता है अगर उसका अपना कोई भाई न हो या 


उसके पिता किसी लड़के को गोद न लिये हों ।


 माँ ख़ुद भी नहीं चाहती कि उसकी बेटी को 


पैतृक संपत्ति के रूप में मकान मिले ।होतीं होंगीं 


कोई क्रांतिकारी माएँ जो चाहती होंगी उसके 


बेटा- बेटी दोनों अपने पिता के मकान के 


बराबरी में हक़दार हों ।


हम पर समाज का और अपनी सुविधा का बड़ा 


प्रभाव रहता हैं । लड़कियाँ अपनी वैवाहिक 


जीवन के सुख दुःख में इतना डूबी रहतीं हैं कि वे 


अपने हक़ के लिये लड़ना नहीं चाहतीं । 


समाज के लिये बने क़ानून का पालन इंसान 


मजबूरी में ही करता है ।


समाज का सबसे कमजोर वर्ग लड़कियों का ही 


है ।जाति , धर्म में बंटी लड़कियाँ आत्मगौराव में 


डूबी हैं लड़कियाँ ।


अपने पैतृक हक़ से आँखें मूँदी हैं वे ।



खूबसूरत है सुबह



#इन्दु_बाला_सिंह


आज सो कर उठी तो लगा - दुनिया कितनी 


सुंदर है । धूप पसरी है सड़क और मकानों पर । 


हमारे देखने का नज़रिया ही दुनिया अच्छा बुरा 


बनाता है । कर्मठ इंसान काम करता है । अपने 


आस पास ख़ुशियाँ बिखेरता है । आलसी इंसान 


नकारात्मक ऊर्जा का भंडार रहता है ।दुनिया 


व्यर्थ है का विचार बाँटता फिरता है । हम धरती 


की संतान हैं । भला हमारी जननी कैसे हमारे 


लिये बुरी हो सकती है । अपनी अकर्मण्यता को 


कायर दूसरों को दोष दे कर छुपाते हैं ।


दिन भर के थके कर्मयोगी को ही रात थपकी दे 


के सुलाती है ।



माँ और बच्चे

 


#इन्दु_बाला_सिंह


पापा आ गये हैं । चलो घर । - माँ ने कहा 


अपनी पार्क में खेलती चार वर्षीय बेटी को ।


क्या बचपन में बच्चे के मन में अपने पापा के 


प्रति डर नहीं बैठ रहा है । घर का महत्त्वपूर्ण 


व्यक्ति उसका पिता है । ऐसी बच्ची अपनी माँ


 से क्यों डरे ?


मुझे याद है मेरी एक महिला परिचित बोलती थी 


कि उसकी बेटी उसे धमकाती है - पापा से मैं 


बोल दुंगी।


वह तो तीन वर्षीय लड़की थी । वह बच्ची अपनी 


माँ का कहना  बिलकुल नहीं मानती थी ।


घर अनजाने में  हानिकारक माहौल पैदा हो 


जाता है ।



मोह



  


#इन्दु_बाला_सिंह


मोह अंधा होता है । वह जिसे प्यार करता है उसकी सारी ग़लतियों 

की और से आँख मूँद लेता है । अधिक मोह इनसान का  किसी के 

प्रति हो तो वह दोनों को क्षति पहुँचाता है ।


इंसान का मोह जब किसी के प्रति ज़िम्मेवारी के साथ जुड़ता है तो 

वह उसे  तो कमजोर तो बनाता ही है  मोहधारी इंसान को भी हानि 

पहुँचाता है ।


मूलतः मोह का प्रतिशत इंसान में दस प्रतिशत से ज़्यादा नहीं रहना

 चाहिये।और चिंता का मात्र पाँच प्रतिशत भाव रहना चाहिये मन में ।

हमें अपने निकटस्थ , निर्भरशील व्यक्ति को मज़बूत बनाते हुये अपनी 

ज़िंदगी भी तो जीनी है ।ग़र सदा रिश्तों के लिये जीते रहे हम तो अपने 

जीवन के अंतिम पल में अफ़सोस करने के सिवा  कुछ नहीं बचेगा 

हमारे हाथ में ।


अंतिम समय में मुट्ठी खुल जायेगी और हम अपने समय को चाह कर 

भी नहीं रोक पायेंगे ।



आज के युवा



#इन्दु_बाला_सिंह


आजकल लड़के अपने माता पिता का सम्मान नहीं करते ।  माता 

पिता सही हों  या ग़लत । क्या फ़र्क़ पड़ता है । उन्हें ग़लत कह कर वे 

कौन सा सुख पाते हैं मुझे पता नहीं ।


और तो और बहुएं भी सास को मारने में आनंद पातीं हैं ।


इससे तो भला है बेटे को अलग कर दें । माता का पुत्र के प्रति मोह 

उसके लिये आत्मघाती होता है । कारपोरेट जगत की चमक ने पैसों 

और भौतिक  सुख सुविधा के नशे डुबो दिया है युवाओं को ।



Saturday, 25 January 2025

प्यार एक ख़्याल है



#इन्दु_बाला_सिंह


प्यार  पेट भरे लोगों  की बपौती है । अमीरों का शौक़ है । ग़रीबों के लिये कैंसर की बीमारी है । 


इंसान पेट भरने के लिये भटकता है सुबह से शाम तक  । माँ बाप बच्चों के लिये अपने सपने भूल जाते हैं । कभी कभी तो औलाद के कमाऊ होने उसका घर बसने का सपना लिये वे  गुजर जाते हैं ।


अपने परिवार की आर्थिक , सामाजिक  सुरक्षा से बढ़ कर उनके जीवन में कुछ नहीं रहता इंसान के जीवन में ।



बेटों की चाहतें



#इन्दु_बाला_सिंह


ग़लत कहते हैं लोग - माँ का आंसू बेटे के सामने 


नहीं निकलना चाहिये ।


समय बदल गया है । बेटों की चाहतें बदल गयीं 


हैं । उन्हें अपनी माँ में सहायिका का रूप दिखता


 है ।श्रद्धा नहीं है अब उनमें।


सब जल्दी से जल्दी जीवन के  सुख भोग लेना 


चाहते हैं । सहिष्णुता और रिश्तों का महत्व गुम 


गया है ।पैसा बोलता है । यूँ लगता है अब पैसा 


ही सबकुछ है उनके लिये।


अमेरिका का आकर्षण इतना ज़्यादा है कि वह 


स्वर्ग की दुनिया बन गयी है युवाओं के लिये । 


माना बहुत सुविधायें हैं वहाँ पैसे हैं पर जड़ों से 


कट कर इंसान क्या कभी  सुख पाया है ।


जब तक चेतते हैं युवा लौटने की गुंजाइश ख़त्म 


हो चुकी रहती है । वे अपनी पुरानी युवावस्था 


की दुनिया खोजते हैं जहां उनके लिये कोई 


जगह नहीं बची रहती है ।



स्मार्ट सिटी -2





#इन्दु_बाला_सिंह


आगे बढ़ने पर हम पायेंगे अठारह तल्ला बिल्डिगें । 


हर बिल्डिंग के निवासियों को अपनी कारें और 


मोटरसाइकिल या स्कूटी रखने के लिए सड़क 


के सामने सफ़ेद पेंट से निशान लगे ब्लॉक हैं 


जिनके अंदर लोग अपनी सवारियाँ रख सकते हैं 


इसके अलावा एरियाके अनुसार चार तल्ला और 


तीन तल्ला घुमावदार कार गैरेज हैं ।


सड़क के किनारे एक से बढ़ कर एक दुकानें हैं 


जहां हम राशन , सब्जी और दवाएँ ले सकते हैं । 


चाय समोसे की दुकानें हैं । पिज्जा की भी 


दुकान है ।


फ्लैट में प्रवेश करने के लिये भी सिक्योरिटी के 


माध्यम से गुजरना पड़ता है । 


घरों में चलते किंडरगार्टैन स्कूल भी दिखते हैं 


यहाँ ।


क्लब और स्टेडियम भी है जहां बच्चे , युवा और 


बुजुर्ग अपना समय काट सकते  हैं ।


अस्पताल बनने जा रहा है ।


कुल मिला कर पलावा सिटी अभी विकसित हो 


रही है ।


नये मकान बन रहे हैं ।


पलावा सिटी रहने लायक़ एक सुरक्षित और 


शांत स्थान है ।



स्मार्ट सिटी -1

 




#इन्दु_बाला_सिंह




पोल्युशन कंट्रोल , सुलभ बिजली और पानी , 


स्कूल और अस्पताल , निवास योग्य घर , 


सुरक्षा , चरित्र विकास को ध्यान में रख कर 


स्मार्ट सिटी की योजना बनी है । जैसे पलावा 


सिटी ।


पलावा सिटी मुंबई के भीड़ को राहत देने के 


उद्देश्य से बनी है ।यह दर्शनीय है ।इसकी 


गगनचुंबीं इमारतें मन को मोहती हैं ।इस सिटी 


में प्रवेश करने के लिये हमें सिक्योरिटी की 


परमिशन लेने की ज़रूरत पड़ती है ।एक बार 


आप सिटी में प्रवेश कर जाइये तो इसकी साफ़ 


सुथरी कॉलोनी इसकी आपको खुश कर देगी ।


प्रवेशद्वार के ठीक बग़ल में दो स्कूल हैं लोधा 


वर्ल्ड स्कूल और श्री राम यूनिवर्सल  स्कूल ।

    


क्रमश:


आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस



#इन्दु_बाला_सिंह


आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की सहायता से हम 


समाज सुधार कर सकते हैं ।


अस्पताल , विद्यालय , खेल के स्टेडियम , लिंग भेद 


मिटाने जैसी समस्याओं से हम जूझ सकते हैं । अब 


तो चैट जी पी टी हमारे प्रश्नों के उत्तर लिख कर देता 


है । एलेक्सा हमारे प्रश्न का उत्तर सेकंड में ही गूगल 


कर के सुना देती है ।


 

 

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस हमारी मित्र है कम 

 

समय में इसकी सहायता से हम बहुत सारे 

 

काम कर सकते हैं । तभी तो स्कूलों में भी 

 

छात्रों से इसका परिचय करवाया जा रहा है ।


तो आइये हम दोस्ती करें आर्टिफिशियल इंटेलिजेस से ।



अहंकारी इंसान

 


#इंदु_बाला_सिंह 


कुछ बच्चों में बड़े होने के बाद अहंकार जन्म ले लेता है ।


वे अपने माता पिता में दोष ढूँढते हैं ।  


जो इंसान अपने माता पिता का कृतज्ञ नहीं है वह भला 


ऑफिस में , मित्र मंडली में कैसे सामंजस्य बिठा पायेगा ।


हमें पाल पोस कर माँ बड़ा करती है । पिता आर्थिक और 


सामाजिक सुरक्षा देता है हमें । अगर आप सिंगल पैरेंट 


के संतान हैं तो उसका कार्यभार अपनी संतान को बड़ा 


करने में कितना बढ़ता है यह आम लोग नहीं समझ पाते ।


हमें बड़े हो कर अपने पालनहार को सम्मान और सुरक्षा 


देनी चाहिये ।


ख़बरें चलतीं हैं । मुहल्ले के महिलायें बतियातीं हैं घरों 


के कहानियाँ ।कितनी नालायक होगी वह औलाद   


छलनी ले कर सारा समय अपने माँ बाप की ग़लतियों 


को छान कर निकालता है । 


गाँव में आम बोल चाल में कहते हैं ईश्वर में भी दोष था 


तो हम तो आम इंसान हैं हमसे भी ग़लतियाँ होती हैं । 


परिवार में ग़लतियों को नज़रअंदाज़ किया जाता है । 


तभी तो रिश्ते निभते हैं ।


जिसने सबल होने के बाद माँ में दोष निकाला । पिता 


को सम्मान न दिया वह इंसान सम्मान लायक नहीं है ।



मुंबई में कुछ वर्ष

  कुछ साल मुंबई में क्या रही कि मोहित हो गई म्हारष्ट्र के कल्चर से । छोटी छोटी लड़कियां लड़के कॉलोनी के प्रोग्राम में नृत्य करते थ...