#इंदु_बाला_सिंह
कुछ बच्चों में बड़े होने के बाद अहंकार जन्म ले लेता है ।
वे अपने माता पिता में दोष ढूँढते हैं ।
जो इंसान अपने माता पिता का कृतज्ञ नहीं है वह भला
ऑफिस में , मित्र मंडली में कैसे सामंजस्य बिठा पायेगा ।
हमें पाल पोस कर माँ बड़ा करती है । पिता आर्थिक और
सामाजिक सुरक्षा देता है हमें । अगर आप सिंगल पैरेंट
के संतान हैं तो उसका कार्यभार अपनी संतान को बड़ा
करने में कितना बढ़ता है यह आम लोग नहीं समझ पाते ।
हमें बड़े हो कर अपने पालनहार को सम्मान और सुरक्षा
देनी चाहिये ।
ख़बरें चलतीं हैं । मुहल्ले के महिलायें बतियातीं हैं घरों
के कहानियाँ ।कितनी नालायक होगी वह औलाद
छलनी ले कर सारा समय अपने माँ बाप की ग़लतियों
को छान कर निकालता है ।
गाँव में आम बोल चाल में कहते हैं ईश्वर में भी दोष था
तो हम तो आम इंसान हैं हमसे भी ग़लतियाँ होती हैं ।
परिवार में ग़लतियों को नज़रअंदाज़ किया जाता है ।
तभी तो रिश्ते निभते हैं ।
जिसने सबल होने के बाद माँ में दोष निकाला । पिता
को सम्मान न दिया वह इंसान सम्मान लायक नहीं है ।
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