#इन्दु_बाला_सिंह
बेटी को अपने पिता से वसीयत में मकान तभी
मिलता है अगर उसका अपना कोई भाई न हो या
उसके पिता किसी लड़के को गोद न लिये हों ।
माँ ख़ुद भी नहीं चाहती कि उसकी बेटी को
पैतृक संपत्ति के रूप में मकान मिले ।होतीं होंगीं
कोई क्रांतिकारी माएँ जो चाहती होंगी उसके
बेटा- बेटी दोनों अपने पिता के मकान के
बराबरी में हक़दार हों ।
हम पर समाज का और अपनी सुविधा का बड़ा
प्रभाव रहता हैं । लड़कियाँ अपनी वैवाहिक
जीवन के सुख दुःख में इतना डूबी रहतीं हैं कि वे
अपने हक़ के लिये लड़ना नहीं चाहतीं ।
समाज के लिये बने क़ानून का पालन इंसान
मजबूरी में ही करता है ।
समाज का सबसे कमजोर वर्ग लड़कियों का ही
है ।जाति , धर्म में बंटी लड़कियाँ आत्मगौराव में
डूबी हैं लड़कियाँ ।
अपने पैतृक हक़ से आँखें मूँदी हैं वे ।
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